Advertisement

Responsive Advertisement

बजट सत्र में पेश होगा छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक

मूकएक्सप्रेस24 रायपुर। प्रदेश में प्रलोभन और दबाव के माध्यम से होने वाले अवैध मतांतरण को रोकने के लिए सरकार ने कानूनी घेराबंदी तेज कर दी है। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की पहली बैठक में प्रस्तावित ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक’ के मसौदे पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जबरन होने वाली गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए है। गृह मंत्री विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में विधेयक के कानूनी पहलुओं पर मंथन हुआ। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी को धर्म के प्रचार का अधिकार है, लेकिन प्रलोभन या धमकी से मंतातरण कराना संवैधानिक रूप से गलत है।

सरकार का प्रयास है कि नया कानून इतना मजबूत और तर्कसंगत हो कि उसे न्यायालय में चुनौती न दी जा सके। समिति अन्य राज्यों के मतांतरण विरोधी कानूनों और उनके समक्ष आई कानूनी अड़चनों का भी बारीकी से अध्ययन कर रही है। सूत्रों की मानें तो सभी संवैधानिक पहलुओं को सुरक्षित करने के बाद इस ऐतिहासिक विधेयक को फरवरी-मार्च 2026 के बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इस कानून से खासकर आदिवासी क्षेत्रों में आ रही शिकायतों का समाधान होगा और सामाजिक सौहार्द बना रहेगा।

Post a Comment

0 Comments