मूकएक्सप्रेस24 रायपुर। नक्सली लीडर देवजी के आत्मसमर्पण को राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों से जवानों को लगातार सफलता मिल रही है। उन्होंने देवजी के समर्पण को महत्वपूर्ण सफलता करार देते हुए यह भी बताया कि संग्राम ने भी आत्मसमर्पण किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन घटनाओं से स्पष्ट है कि नक्सलियों की कमर टूट चुकी है और प्रदेश में शांति व विकास की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। बालौदाबाजार के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से चर्चा में मुख्यमंत्री साय ने सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों, आधुनिक रणनीतियों और जमीनी स्तर पर की गई कार्रवाइयों का असर अब दिखने लगा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है, जिसके कारण कई नक्सली संगठन कमजोर पड़े हैं और आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में और भी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
अपने दौरे के उद्देश्य पर मुख्यमंत्री साय ने जानकारी दी कि वे गिरौदपुरी स्थित गुरु घासीदास की तपोस्थली में आयोजित मेले के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि यह स्थल प्रदेश की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे वहां पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। उन्होंने मेले के आयोजन को सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का महत्वपूर्ण अवसर बताया। धर्मांतरण को लेकर प्रदेश में चल रही सियासी बहस पर भी मुख्यमंत्री ने
प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सरकार गंभीर है और बजट सत्र में विधेयक लाया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विधेयक के संबंध में विस्तृत जानकारी उचित समय पर साझा की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य सामाजिक संतुलन बनाए रखना और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। साथ ही उन्होंने कहा, “थोड़ा इंतजार करिए,” जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार इस विषय पर ठोस कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री के इस बयान को प्रदेश की राजनीति और सुरक्षा परिदृश्य के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। एक ओर जहां नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाएं सुरक्षा बलों के लिए मनोबल बढ़ाने वाली हैं, वहीं दूसरी ओर धर्मांतरण विधेयक को लेकर बजट सत्र में संभावित चर्चा राजनीतिक हलकों में उत्सुकता का विषय बनी हुई है। मुख्यमंत्री साय के अनुसार, सरकार प्रदेश में शांति, विकास और सामाजिक सौहार्द को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रही है।
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