जनसंपर्क बना ‘कमीशन संपर्क’!दिल्ली–मुंबई वालों पर करोड़ों की बारिश,छत्तीसगढ़ के पत्रकार लाइन से आउट

मूकएक्सप्रेस24 रायपुर – छत्तीसगढ़ सरकार का जनसंपर्क विभाग इन दिनों जनहित से ज़्यादा “कमीशन हित” में काम करता नज़र आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि दिल्ली–मुंबई की नामी कंपनियों को करोड़ों–करोड़ों के विज्ञापन मिल रहे हैं, जबकि राज्य के स्थानीय पत्रकारों को नियम–कानून और बजट का डंडा दिखाकर बाहर का रास्ता।


सवाल सीधा है— दिल्ली–मुंबई वालों का कमीशन सेट है, और छत्तीसगढ़ वालों का नहीं?

ज़मीन पर काम, इनाम बाहर वालों को….सरकारी योजनाएं गांव–गांव, गली–गली पहुंचाने का असली काम स्थानीय पत्रकार करते हैं आदिवासी अंचल हो, दूरस्थ ब्लॉक हो या कस्बे—सरकार की आवाज़ वहीं तक वही पहुंचाते हैं। फिर भी फायदा उन्हें नहीं, जिनका छत्तीसगढ़ से कोई वास्ता ही नहीं!

दिल्ली–मुंबई की एजेंसियों को

न गांव दिखता है

न गरीब

न योजना

उन्हें दिखता है सिर्फ—विज्ञापन और कमीशन।
कुर्सी से चिपके ‘मठाधीश’ अफसर

जनसंपर्क विभाग में कुछ अधिकारी–कर्मचारी सालों से कुर्सी से ऐसे चिपके हैं, जैसे वही विभाग के मालिक हों।

सरकार बदली, मंत्री बदले— लेकिन ये अफसर हर सरकार में सेट!

यही ‘मठाधीश’ तय करते हैं—
किसे विज्ञापन मिलेगा
किसे भूखा रखा जाएगा
और किसकी फाइल धूल खाएगी
सरकार को ही दिखाया जा रहा आईना नहीं, धुआं

आरोप है कि यही अफसर सरकार को गलत रिपोर्ट और फर्जी संतुष्टि का डोज़ दे रहे हैं।कागज़ों में प्रचार ज़ोरों पर, लेकिन ज़मीन पर सरकार गायब!


नतीजा?

सरकार की साख पर बट्टा स्थानीय मीडिया हाशिए पर जनता तक अधूरी जानकारी
अब भी नहीं जागी सरकार तो…

अगर सरकार ने अब भी आंख नहीं खोली, तो सवाल और तेज़ होंगे—
कमीशन का प्रतिशत कितना है?
किसके इशारे पर विज्ञापन बांटे जा रहे हैं?
स्थानीय पत्रकारों का गुनाह क्या है—ईमानदारी?
सीधी मांग
जनसंपर्क विभाग में तत्काल ट्रांसफर सर्जरी
विज्ञापन वितरण की उच्चस्तरीय जांच
और स्थानीय मीडिया को हक़ की हिस्सेदारी
वरना जनता पूछेगी—
जनसंपर्क विभाग है या
दिल्ली–मुंबई की एजेंसियों का एटीएम?

Post a Comment

0 Comments

Copyright (c) 2026 mookexpress24.in All Right Reseved